फोटो- बीना सेवाकेंद्र पर राजयोग ध्यान साधना करते हुए ब्रह्माकुमारी बहनें। 

कोरोना के भय से मुक्ति के लिए राजयोग से दे रहे शांति और शक्ति के प्रकम्पन

  • सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए रोजाना ब्रह्ममुहूर्त में 3 बजे से जारी है ध्यान साधना

  • सभी बहनों मिलकर रोजाना पांच घंटे कर रही हैं राजयोग साधना

  • ब्रह्माकुमारीज संस्थान के बीना सेवाकेंद्र पर 22 मार्च से जारी है अखंड योग-तपस्या

फोटो- बीना सेवाकेंद्र पर राजयोग ध्यान साधना करते हुए ब्रह्माकुमारी बहनें।

8 अप्रैल, नवयुग टाइम्स, संवादाता।

 बीना। विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के संक्रमण से पूरी दुनिया जूझ रही है। इससे बचने के लिए सरकार से लेकर तमाम संस्थाएं और संगठन अपने-अपने स्तर पर जुटे हुए हैं। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बीना सेवाकेंद्र पर नगर सहित जिला, प्रदेश, देश  और विश्व के लोगों को कोरोना के भय से मुक्ति के लिए पिछले 17 दिन से अखंड योग-साधना जारी है। सेवाकेंद्र पर निवासरत सभी ब्रह्माकुमारी बहनें ब्रह्ममुहूर्त में अलसुबह 3 बजे से रोजाना लोगों में कोरोना के भय को दूर करने के लिए राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से शुभ संकल्पों के प्रकम्पन फैला रही हैं। साथ ही पूरे विश्व को इस भय के माहौल में शांति और शक्ति के बाइब्रेशन दे रही हैं। 22 मार्च से सेवाकेंद्र पर सत्संग बंद है।

  • भय से मुक्त करता है आत्मबल – जानकी

वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी जानकी दीदी ने बताया कि हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया है कि विश्वभर में कोरोना के भय के कारण 30 फीसदी मानसिक रोगी बढ़ गए हैं। लोग कोरोना के भय के साये में जी रहे हैं। ऐसे में हम अपने आत्मबल की शक्ति से ही इस भय से मुक्त रहकर दूसरों की सेवा कर सकते हैं। सभी तरह के मानसिक रोगों की एक ही दवा है- ध्यान। ध्यान (योग) के नियमित प्रयोग से हम सभी तरह की मानसिक बीमारियों से दूर रहकर भयमुक्त जीवन जी सकते हैं। राजयोग ध्यान बीना के साथ खुरई, पठारी उपसेवाकेंद्र पर भी जारी है।

  • राजयोग ध्यान से इस तरह फैलाते हैं शुभ बाइब्रेशन….

ध्यान के मुद्रा में बैठकर सबसे पहले खुद को आत्मा समझते हुए परमात्मा से संबंध जोड़ते हैं। फिर राजयोग के जरिए शक्तिशाली, श्रेष्ठ व पवित्र संकल्प लेकर परमात्मा का स्मरण करते हुए उनका आह्नान किया जाता है। जब ध्यान की अवस्था गहन एकाग्रता में चली जाती है तो फिर पहले खुद को चार्ज (शक्ति लेना) कर उस ऊर्जा को प्रकृति के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश को शुभ प्रकम्पन भेजते हैं। राजयोग ध्यान की वह अवस्था है जब व्यक्ति इस देह को भूलकर खुद को आत्मस्वरूप में स्थित करता है। राजयोग ध्यान की पद्धति सबसे प्राचीन और हमारी पुरातन संस्कृति है। इसके नियमित प्रयोग से कई भाई-बहनों की गंभीर बीमारियां भी ठीक हो चुकी हैं। साथ ही 10 हजार से अधिक हार्ट के मरीज आज सामान्य जीवन जी रहे हैं।

  • विश्वभर में सभी ब्रह्माकुमार भाई-बहनें कर रहे हैं साधना

ब्रह्माकुमारी जानकी दीदी ने बताया कि विश्व के 140 देशों में स्थित ब्रह्माकुमारीज के सभी सेवाकेंद्रों पर अखंड योग साधना जारी है। 46 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें सहित संस्थान से जुड़े 12 लाख से अधिक नियमित विद्यार्थी अपने-अपने घरों में रोजाना सुबह 4 बजे से प्रकृति के लिए राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से शुभ प्रकम्पन दे रहे हैं। हमारे विचारों का जीव-जंतुओं सहित पेड़-पौधों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। यह बात कई शोधों के माध्यम से स्पष्ट हो चुकी है।

  • इन उपायों को अपनाकर बढ़ा सकते हैं मन की शक्ति…

  • सभी घरों में सुबह ऊं की ध्वनि का कम से कम दस मिनट तक उच्चारण करें।

  • पानी पीते समय संकल्प करें कि- ये पानी नहीं अमृत है। इसमें परमात्मा की शक्ति समा रही है।

  • भोजन करते समय संकल्प करें कि ये औषधि है। इसमें सभी प्रकार के विटामिन हैं। वैद्यनाथ परमात्मा की समस्त ऊर्जा भोजन में समाकर शरीर के अंदर पहुंच रही है। इससे मेरे अंदर की इम्युनिटी पावर बढ़ रही है।

  • सुबह उठते ही अच्छा साहित्य, धर्मग्रंथ पढ़ें। नकारात्मक समाचार कम से कम सुनें।

  • सोशल डिस्टेंस के पालन के साथ कर रहे योग

सेवाकेंद्र पर समर्पित सभी बहनें 22 मार्च से विशेष विश्व को कोरोना के भय से मुक्ति के लिए राजयोग ध्यान साधना कर रही हैं। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए ध्यान साधना कर रहे हैं। सभी बहनें रोजाना कम से कम तीन घंटे बैठकर पूरे विश्व को परमात्मा से शक्ति लेकर शुभ संकल्प, श्रेष्ठ संकल्प चारों ओर के वायुमंडल में फैलाती हैं। ताकि लोग इस भय से निकलकर खुशहाल जिंदगी जीएं। लॉकडाउन के चलते सेवाकेंद्र पर सभी पब्लिक प्रोग्राम स्थगित कर दिए गए हैं। सुबह होना वाला सत्संग भी 22 मार्च से बंद है।

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