डॉ.मोहित गुप्ता, जी.बी.पन्त हॉस्पीटल, नई दिल्ली

कोरोना बीमारी को मन से भी भगायेंगे और विश्व से भी भगायेंगे

  • हमारे हेल्थ केयर्स जो विश्व की सेवा में जुड़े हैं वो हमारे अपने हैं, हमें उनका भी उत्साह बढ़ाना है

  • अपना ख्याल रखते हुए भी दूसरों का ख्याल रखना यही सेवा का यथार्थ रूप है

डॉ.मोहित गुप्ता, जी.बी.पन्त हॉस्पीटल, नई दिल्ली

नवयुग टाइम्स, स्वास्थ्य एवं सेहत।

हमारे हेल्थ केयर्स स्पेशलिस्ट जब मरीजों का ईलाज कर रहे हैं तो कहीं न कहीं उन्हें थोड़ा मन के अंदर डर, हमारे उत्साह के अंदर कमी देखने में आ जाती है। ऐसा लगता है क्या हम इस पर विजय प्राप्त कर पायेंगे। क्या यह हमारे लिए संभव होगा। कई बार हमारे हेल्थ केयर्स वरकर्स भी अपनी जान खो बैठते हैं। अगर हमको इस बीमारी को जितना है तो हमें इस बीमारी से ऊपर उठना होगा। और उसके लिए आवश्यक है कि हम अपने हॉस्पीटल के अंदर, अपनी क्लिनिक के अंदर, अपने वर्क प्लेस पर भी, अपने वातावरण को पॉजीटिव बनाकर रखें। ये भी एक बहुत बड़ी सेवा है। अपने संकल्पों को दृढ़ रखें कि हम इस बीमारी पर विजय जरूर प्राप्त करेंगे। कभी-कभी एक-दूसरे से खुशी की बात करना, एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाना ये भी हमारे हॉस्पीटल का एटमॉसफेयर हमारे अपने मन का जो हमारा चिंतन है उसको सकारात्मक बनाता है। जब हम अपने आस-पास के वातावरण को, अपने मन को सकारात्मक रखते हैं, तो इससे हमारी शक्ति बढ़ती है। और हम लोग स्वत: ही एक-दूसरे का ईलाज पॉजिटिव तरीके से, सुदृढ़ तरीके से कर सकते हैं। तो यह बहुत आवश्यक है कि हमें मरीज का भी ईलाज करना है और मरीज के साथ-साथ अपने मन का और बाहर का वातावरण पॉजीटिव और पावरफुल रखना है। किसी को भी निरूत्साहित नहीं होने देना है। एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते रहना है। इसी के साथ हम देखते हैं हमारे बहुत सारे लोग आज घर के अंदर लॉकडाउन में हैं। लेकिन मैं ये समझता हूं कि डॉक्टर्स और हेल्थ केयर्स वरकर्स अपना काम तो कर रहे हैं लेकिन आप लोग जो घर पर हैं आप भी कम सेवा नहीं कर रहे हैं। लेकिन मेरा आपसे एक अनुरोध है कि हमारे हेल्थ केयर्स वर्क र्स जो आपकी सेवा में लगे हुए हैं, देश और विश्व की सेवा में जुड़े हैं वो हमारे अपने हैं। हमें उनका भी मन से उत्साह बढ़ाना है। हमने एक-दूसरे के लिए ताली भी बजायी, हमने एक-दूसरे को अच्छी-अच्छी बातें भी कही लेकिन इसके साथ-साथ ये भी समझिये जो लोग आज सेवा में हैं वो भी आपके अपने ही हैं, हो सकता है कि आपके घर वाला भी कोई डॉक्टर, नर्स या हेल्थ केयर प्रोफेशनल हो, उनको भी हम प्यार से एक्सेप्ट करें। जब वो किसी मरीज का ईलाज करके आते हैं तो इसका अर्थ ये नहीं है कि वो भी बीमार हैं या उनको भी इंफेक्शन हो गया है। नहीं, हमें भी उनका उत्साह बढ़ाना है। क्योंकि वो अपना ख्याल रखते हुए भी हमारा ख्याल रख रहे हैं। यही सेवा का यथार्थ रूप है। तो आइए हम सब अपने संकल्पों से सेवा के इस नये प्रतिरूप को सकार रूप दें। हम इस कोरोना की बाीमारी को अपने मन से भी भगायें, इसके डर को भी अपने मन से भगायें और समस्त विश्व से इस बीमारी को भगाने की निमित्त बनें। यही एक सच्ची सेवा है।

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