आप जो पढ़ते हैं, सुनते हैं, देखते हैं, वो आप हैं। इसकी डेप्थ को अगर हम समझे तो जीवन में बहुत कुछ बदल जायेगा।

मीडिया, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया वी आर फ्लाडेड विद इनफॉरमेशन। हम बिना सोचे-समझे सब कुछ लेते जा रहे हैं अंदर। जो हम पढ़ रहे हैं, देख रहे हैं, सुन रहे हैं, किसी ने पोस्ट किया, किसी ने वाटसआप में डाला हमने पूरा पढ़ लिया। जब हम पढ़ रहे हैं या सुन रहे हैं तो हम कहते हैं हम पढ़ रहे हैं। हम ये नहीं कहते कि हम ये बन रहे हैं। हम कहते हैं ये हम पढ़ रहे हैं, ये हम देख रहे हैं, ये हम सुन रहे हैं, अगर हम उसके साथ एक लाइन जोड़ दे कि हम ये बन रहे हैं, तो आप देखना कि निगेटिव सोचना, देखना उसी समय बंद हो जायेगा।

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