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राष्ट्रगान व भारत माता की जयघोष और दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ 10 वां दीक्षांत व सम्मान समारोह
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झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने किया 10 वां दीक्षांत समारोह को संबोधित
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भारत एक विशाल देश होने के साथ-साथ सर्वाधिक युवाओं वाला देश है
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भारतीय शिक्षा का इतिहास भारतीय सभ्यता का इतिहास है
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तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परम्परा आज भी हमें गौरवन्वित कर रही है
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ब्रह्माकुमारी संस्था मानवीय सम्पदा को मूल्यों से संवारने का कार्य कर रही है
नवयुग टाइम्स, प्रतिनिधि।
आबू रोड। ब्रह्माकुमारी संस्था के शिक्षा प्रभाग द्वारा आयोजित 10 वां दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए झारखण्ड की राज्यपाल माननीय द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत एक विशाल देश होने के साथ-साथ सर्वाधिक युवाओं वाला देश है। इस विशाल मानव सम्पदा को शिक्षा प्रदान कर श्रेष्ठ नागरिक बनाना सबसे महान कार्य है। सर्वप्रथम गोपाल कृष्ण गोखले पहले भारतीय थे जिन्होंने आज से लगभग 100 साल पहले इम्पेरियल लेजिसलेटिव एसेम्बली से भारतीय बच्चों के लिए अनिवार्य रूप से शिक्षा प्रदान करने की मांग की। जिसे बाद में हमारे संविधान में सम्मिलत किया गया।
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आज भी हमें गौरवन्वित कर रही है
आगे उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा का इतिहास भारतीय सभ्यता का भी इतिहास है। प्राचीन भारतीय शिक्षा अपने समय की समुन्नत और उत्कृष्ट शिक्षा थी। तब भारत को विश्व गुरू कहा जाता था और यह ज्ञान केंद्रों के रूप में विख्यात था। तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परम्परा आज भी हमें गौरवन्वित कर रही है।
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विकास की कुंजी है शिक्षा
आगे उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ओजस्वी नेतृत्व में नए भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए भारत नए आध्यात्मिक उड़ान भर रहा है। भारत को पुन: विश्व गुरू बनाने का वातावरण बन रहा है। वर्तमान समय में तीव्र गति से बढ़ रही हिंसा की प्रवृत्ति व मानवीय मूल्यों का पतन प्रत्येक नागरिक को विचलित कर रहा है। हम सब जानते हैं शिक्षा विकास की कुंजी है।
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ब्रह्माकुमारी संस्थान ने शिक्षा को एक नई दिशा प्रदान की है
आगे उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मानव सम्पदा को मूल्यों से संवारने का कार्य कर रही है। समस्याओं का समाधान करना शिक्षा जगत की सबसे बड़ी चुनौति है। आध्यात्मिकता व प्रचीन भारतीय संस्कृति का अनुसंधान करके ब्रह्माकुमारी संस्था का शिक्षा प्रभाग ने मूल्य शिक्षा पर विभिन्न पाठ्यक्र म तैयार करके शिक्षा जगत की सबसे महत्वपूर्ण विलुप्त कड़ी वैल्यूज एज्युकेशन का वर्तमान शिक्षा प्रणाली से जोड़कर एक नई दिशा प्रदान किया है। मूल्य शिक्षा विद्यार्थियों को आत्म अनुसंधान का सुअवसर प्रदान कर उन्हें वर्तमान जीवन से जोड़ते हैं। वैल्युज एज्युकेशन का अध्ययन व उध्यापन दोनों स्वयं तथा सम्पूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी है।
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नये भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है
ब्रह्माकुमारी संस्था के पास मूल्यों व आध्यात्मिक शिक्षा के अनुभवी प्रशिक्षकों तथा सुविधाओं का एक विशाल नेटवर्क है। जिसका लाभ उठाकर शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों के अंदर मूल्यों के प्रति आस्था, जीवन में अनुशासन, कौशल, स्वच्छता की भावना तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की भावना उत्पन्न करके एक सशक्त नए भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।
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मन में सदा ईश्वर की स्मृति बनी रहे – दादी
इससे पूर्व स्वागत सत्र को सम्बोधित करते हुए संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने कहा कि ओम शांति का मंत्र हमें परमात्मा की याद दिलाता है। ओम का अर्थ होता है परमात्मा द्वारा दी गई शिक्षा को जीवन में धारण कर अपना जीवन श्रेष्ठ बनाना। मन में ईश्वर की स्मृति सदा बनी रहे उसके लिए जरूरी है कि परमात्मा द्वारा दी गई शिक्षा को हम अपने जीवन में धारण करें। मनुष्य जीवन अमूल्य जीवन है। जब आत्मा कहा जाता है तब उसका सम्बन्ध परमात्मा से होता है।
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जीवन को सुखी बनाने के लिए मूल्य शिक्षा आवश्यक – निर्मला
ब्रह्माकुमारी संस्था के ज्ञान सरोवर परिसर की डायरेक्टर बीके डॉ.निर्मला दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में मूल्यों की शिक्षा देना बहुत जरूरी है। मूल्य शिक्षा से हमारे अंदर शिष्टाचार की भावना बढ़ती है। जिससे जीवन में नम्रता का विकास होता है। जीवन को सुखी बनाने के लिए मूल्य शिक्षा आवश्यक है। इस शिक्षा को जितना हम दूसरों को बांटेंगे उतना ही हमें यश की प्राप्ति होती है।
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मूल्यों के साथ-साथ संस्कार बनाने की शिक्षा दी जाती है – करूणा
सत्यम शिवम् सुन्दरम् के बोल के साथ दीक्षांत समरोह को सम्बोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था के मल्टी-मीडिया के चीफ ब्रह्माकुमार करूणा भाई ने कहा कि अन्य विश्वविद्यालयों की शिक्षा और ईश्वरीय विश्व विद्यालय में दी गई शिक्षा में मूल अंतर यही है कि यहां मूल्यों की शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कार बनाने और जीवन को सुखी बनाने की शिक्षा दी जाती है। हम सबको पढ़ाने के लिए स्वयं परमपिता परमात्मा ब्रह्मा के शरीर का रथ बनाकर इस विश्व विद्यालय की स्थापना 84 वर्ष पूर्व की थी। यहां दी जा रही शिक्षा को सभी धर्मों के लोग स्वीकार करते हैं।
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आत्म-सम्मान से जीवन जीने की कला सिखाती है मूल्य शिक्षा – मृत्युंजय
शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष ब्रह्माकुमार मृत्युंजय भाई ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मानव को शिक्षित बनाना, राष्ट्र प्रेम की भावना जागना और आत्म-सम्मान से जीवन जीने की कला सीखना है। समाज में बढ़ते हुए अपराध और जातिवाद के कारण उत्पन्न समस्या को रोकना ही मूल्य शिक्षा का उद्देश्य है।
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पाठ्यकम लोकप्रिय बनता जा रहा है – नारायण
अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के कंट्रोलर ऑफ एक्जामिनेशन डॉ.सेल्व नारायण ने कहा कि अन्नामलाई और ब्रह्माकुमारी संस्था के द्वारा प्रारंभ किया गया मूल्य शिक्षा का पाठ्यकम आम लोगों में बहुत ही लोकप्रिय होता जा रहा है। हमारा उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त करना ही नहीं होना चाहिए बल्कि मूल्यों से शिक्षित भी होना चाहिए। हमारे देश की पहचान मूल्यों के आधार पर ही है।
इस दीक्षांत समारोह में स्वागत भाषण माउण्ट आबू के मूल्य शिक्षा और आध्यात्मिक कार्यक्रम के निदेशक डॉ.बीके पाण्ड्यमणि भाई ने दिया। सभी अतिथियों का आभार प्रगट हिसार के प्रो.वेद गुल्यानी ने किया। मंच का कुशल संचालन शिक्षा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका ब्रह्माकुमारी सुमन बहन ने किया। कार्यकम के अंत में सभी अतिथियों को शॉल व मेमोंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया और उत्तीर्ण छात्रों को राज्यपाल द्वारा मूल्य शिक्षा की प्रदान किया गया।