हाइलाइटस –
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कोरोना काल में यज्ञ ने अपने तीन आदि अनमोल रत्नों को खोया
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गुलजार दादी की स्मृति में निर्मित अव्यक्त लोक पर मैपिंग के जरिए दिखाया गया दादी की जीवनी
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दादी सिर्फ दादी ही नहीं थी बल्कि वह तो इस सृष्टि की वह अनमोल रत्न थी जिसे परमात्मा ने अपना साथी बनाया
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मीटिंग में आए हुए भाई-बहनों ने कहा इन तीन वर्षों में बहुत कुछ बदल गया
नवयुग टाइम्स, संवादाता, राजस्थान, 06/04/2022
आबू रोड। ब्रह्माकुमारी संस्था की कार्यकारिणी की बैठक में देशभर से आए हुए वरिष्ठ राजयोगी भाई-बहनों को मधुबन बहुत कुछ बदला हुआ नजर आया। हम सबके बीच जानकी दादी की कमी पूरी भी नहीं हो पाई थी कि समय ने गुलजार दादी और ईशु दादी को भी इशारा दे दिया। यह तो शाश्वत सत्य है कि जो इस सृष्टि पर आया है उसे एक दिन जाना ही पड़ता है। रह जाती है तो सिर्फ उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए कर्म।
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जिसे परमात्मा ने अपना साथी बनाया…
गुलजार दादी की स्मृति में बने अव्यक्त लोक पर मीटिंग में आए हुए भाई-बहनों को दादियों की याद और उनके द्वारा की गई सेवाओं को लाइट एण्ड साउण्ड शो मैपिंग के द्वारा दिखाया गया। इस शो को देखने के पश्चात सबको यही अनुभव हुआ कि दादी हम सबके बीच में ही है और हम सामने दादी को ही सुन रहे हैं। दादी सिर्फ दादी ही नहीं थी बल्कि वह तो इस सृष्टि की वह अनमोल रत्न थी जिसे परमात्मा ने अपना साथी बनाया। दादी के हर कर्म और बोल में परमात्मा की याद समायी हुई थी। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि दादी और परमात्मा दोनों दो नहीं बल्कि एक में ही समाए हुए थे। तभी तो हमलोग दादी के द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार करते थे और उनकी वाणी को सुना करते थे। आज तो सिर्फ रह गई है उनकी मधुर यादें, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
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हम सबकी यादों में कुछ इस तरह बसी हैं दादी