हाईलाइट्स:
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आध्यात्मिक खेती से बदलेगी गांवों की तस्वीर : ब्रह्माकुमारीज
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कृषि और ऋषि परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान
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आध्यात्मिकता और प्राकृतिक खेती से समृद्ध भारत का संकल्प
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ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय सम्मेलन में गूंजा प्राकृतिक खेती का संदेश
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आध्यात्मिकता से सशक्त होंगे किसान, समृद्ध बनेंगे गांव: ब्रह्माकुमारीज का राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन संपन्न
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ब्रह्माकुमारीज के चार दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में देशभर से जुटे किसान, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ
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ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय सम्मेलन में 300 किसानों ने लिया रसायन-मुक्त खेती का संकल्प
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कम लागत, बेहतर उत्पादन : किसानों ने साझा किए यौगिक खेती के अनुभव
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खेत में अध्यात्म की क्रांति / रसायन छोड़ योग की ओर लौटे किसान
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धरती मां को जहर नहीं, प्रेम चाहिए
नवयुग टाइम्स, संवादाता, राजस्थान
माउंट आबू, 19 मई। ब्रह्माकुमारीज के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा “आध्यात्मिकता द्वारा सशक्त किसान और समृद्ध गांव” विषय पर चार दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन ज्ञानसरोवर स्थित हॉरमनी हॉल में किया गया। सम्मेलन में देशभर से लगभग 300 किसानों सहित कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की।

रासायनिक खेती छोड़ने का लिया संकल्प
सम्मेलन में वर्तमान कृषि परिदृश्य पर गहन मंथन किया गया। इस दौरान अनेक किसानों ने रासायनिक खेती का परित्याग कर प्राकृतिक एवं शाश्वत यौगिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनके अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है।
यौगिक खेती से बढ़ी उत्पादकता, मिला बेहतर मूल्य
किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शाश्वत यौगिक खेती अपनाने से भूमि की उर्वरा शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही उत्पादन लागत में कमी आई है और प्रति एकड़ उपज बढ़ी है। प्राकृतिक विधि से उत्पादित फलों एवं सब्जियों की गुणवत्ता श्रेष्ठ होने के कारण बाजार में किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
रासायनिक खेती से घटे मृदा के जीवाणु: डॉ. नाडगौडर

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रूरल डेवलपमेंट एण्ड पंचायतराज यूनिवर्सिटी, गदग के कुलपति डॉ. सुरेश वी. नाडगौडर ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। परंतु विगत दशकों में रासायनिक खेती के बढ़ते प्रचलन से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है तथा लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में भारी कमी आई है। उन्होंने शाश्वत यौगिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ब्रह्माकुमारीज की पहल को सराहनीय बताया।
आध्यात्मिक सशक्तिकरण जरूरी: बद्री विशाल

कृषि निदेशालय लखनऊ के पूर्व सहायक निदेशक बद्री विशाल ने कहा कि मैंने 40 वर्ष किसानों के कल्याण के लिए कार्य किया हूं। आज दावे से कह सकता हूँ कि सिर्फ पैसों से किसान मजबूत नहीं होगा। जब तक उसके भीतर की शक्ति नहीं जागेगी, गांव समृद्ध नहीं होगा। आध्यात्मिक सशक्तिकरण ही भारत को फिर से सोने की चिड़िया बना सकता है। हमारी सनातन संस्कृति में सुख-समृद्धि का जो गूढ़ विज्ञान था, उसे समझने का वक्त आ गया है।
हमारी संस्कृति कृषि और ऋषि की है: हितेश पटेल

गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड, गांधीनगर के अध्यक्ष हितेश भाई पटेल ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा आध्यात्मिकता को गांवों और खेतों तक पहुंचाने का कार्य प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का आधार कृषि और ऋषि परंपरा है। देश की वास्तविक धरोहर संतों-महापुरुषों की शिक्षाओं में निहित है।
हर व्यक्ति कर्मों का किसान: दीदी सुदेश

ब्रह्माकुमारी संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा कि प्रकृति अर्थात धरती मां मानव जीवन के पालन-पोषण का आधार है। आध्यात्मिक दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों की खेती करने वाला किसान है। राजयोग के अभ्यास से जीवन को श्रेष्ठ एवं संतुलित बनाया जा सकता है।
आत्मा से राष्ट्र तक विकास का सूत्र : बीके मृत्युंजय

संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि भारत की कृषि और ऋषि परंपरा को पुनर्जीवित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि आत्मा के विकास से ही परिवार, समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।
संगठन का संकल्प: सशक्त किसान, समृद्ध भारत: दीदी सरला

कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी सरला दीदी ने कहा कि संगठन का ध्येय किसान को सशक्त बनाकर राष्ट्र को समृद्ध करना है। आध्यात्मिकता और राजयोग से जीवन में संतुलन एवं आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।
संस्कृति और संगीत से हुआ स्वागत

कार्यक्रम में सभी अतिथियों का शब्दों से स्वागत कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग के उपाध्यक्ष बीके राजू भाई ने किया। जबकि आभार प्रगट कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके सुमंत भाई ने किया। मंच संचालन कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके तृप्ति बहन ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत बैज, तिलक, पुष्प एवं तुलसी के पौधे भेंटकर किया गया। मेहसाणा सेवाकेंद्र की कुमारियों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। सांसों की सरगम गाए सुस्वागत…” गीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं मधुरवाणी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत में भारतीय कृषि एवं संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का सुंदर चित्रण किया गया।


आशा की किरण
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क्या है शाश्वत यौगिक खेती?
यह खेती की एक प्राकृतिक पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता। इसमें बीजों का शुद्धिकरण, जैविक खाद का उपयोग तथा सकारात्मक संकल्पों एवं राजयोग ध्यान के माध्यम से फसल की वृद्धि की जाती है।
सम्मेलन के संकल्प
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रासायनिक खेती का पूर्ण त्याग
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हर गांव तक यौगिक खेती का संदेश
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आध्यात्मिकता से किसान का आंतरिक सशक्तिकरण
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