व्यापार में सफलता के लिए आध्यात्मिक जागृति आवश्यक : सुदेश दीदी

हाईलाइट्स :

  • ब्रह्माकुमारीज़ ज्ञानसरोवर में व्यापार एवं उद्योग प्रभाग की चार दिवसीय नेशनल वर्कशॉप एवं मेडिटेशन रिट्रीट का शुभारंभ

  • ज्ञानसरोवर में व्यापार एवं उद्योग प्रभाग की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

  • आत्मा के संस्कार ही बनते हैं जीवन की वास्तविक पूंजी

  • राजयोग मेडिटेशन से व्यवसाय और व्यवहार में आता है सकारात्मक बदलाव

  • पी.श्याम ने साझा किया ब्रह्माकुमारी संस्था से दो दशक का अनुभव

  • मानवीय मूल्यों पर आधारित नेतृत्व विकसित करती है ब्रह्माकुमारी संस्था

  • विशेषज्ञों ने बताए आध्यात्मिक सफलता के प्रभावी सूत्र

माउंट आबू, राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के ज्ञानसरोवर परिसर में व्यापार एवं उद्योग प्रभाग द्वारा “व्यापार में सफलता के लिए आध्यात्मिक जागृति” विषय पर आयोजित चार दिवसीय नेशनल वर्कशॉप एवं मेडिटेशन रिट्रीट का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। देशभर से आए प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, व्यवसायियों एवं कॉर्पोरेट जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने इस आध्यात्मिक संगोष्ठी में भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।

‘ओम शांति’ आत्मिक जागृति और जीवन की वास्तविक सफलता का मंत्र : सुदेश दीदी

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं ज्ञानसरोवर की निदेशिका राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा कि “ओम शांति” केवल एक शब्द या अभिवादन नहीं, बल्कि आत्मिक स्वरूप में स्थित होने की पहचान है। उन्होंने कहा कि व्यापार और उद्योग में स्थायी सफलता के लिए केवल आर्थिक समृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक शांति भी उतनी ही आवश्यक है।

आत्मा के साथ मन, बुद्धि और संस्कार भी करते हैं यात्रा : सुदेश दीदी

उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्वयं को शांति, प्रेम, सुख और आनंद से भरकर ऐसा व्यक्तित्व बनाना है, जो दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सके। मनुष्य को ऐसा अविनाशी आध्यात्मिक धन अर्जित करना चाहिए, जो इस जीवन के साथ-साथ आगे भी उसके संस्कारों के रूप में साथ रहे। उन्होंने आत्मा, मन, बुद्धि और संस्कारों के गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि शरीर नश्वर है, किंतु आत्मा अपने संस्कारों, मन और बुद्धि के साथ अपनी यात्रा जारी रखती है। इसलिए स्वयं को और अपने प्रियजनों को वास्तविक शांति प्रदान करने के लिए परमात्मा से संबंध जोड़ना आवश्यक है।

राजयोग मेडिटेशन से व्यवसाय और व्यक्तित्व दोनों में आता है सकारात्मक परिवर्तन : शांतनु डी. परशवर

मुंबई से पधारे एनपीसीआईएल (NPCIL) के ऑपरेशनल डायरेक्टर शांतनु डी. परशवर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें माउंट आबू आकर राजयोग मेडिटेशन का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक आध्यात्मिक परिवर्तन लाता है, जिससे उसके आचरण, व्यवहार और कार्यशैली में गुणात्मक सुधार होता है। यही परिवर्तन व्यवसाय एवं उद्योग जगत में दीर्घकालीन सफलता का आधार बनता है।

आध्यात्मिकता ने बदली जीवन की दिशा, व्यवसायिक भागदौड़ से मिला संतुलन : पी. श्याम

एनएमडीसी सीएसआर के महाप्रबंधक एवं एनएमडीसी सीएसआर फाउंडेशन के निदेशक पी. श्याम ने कहा कि उनका ब्रह्माकुमारी संस्था से लगभग दो दशकों से अधिक पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में कार्यरत रहने के दौरान संस्था के आध्यात्मिक विचारों से उनका पहला परिचय हुआ, जिसने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। बाद में उन्होंने अपनी संस्था के युवा प्रबंधकों को भी इस दिशा में प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जीवन की निरंतर भागदौड़ और लक्ष्य प्राप्ति की प्रतिस्पर्धा के बीच आध्यात्मिकता से दूरी बन गई थी, लेकिन परमात्मा की कृपा से वह भ्रम दूर हुआ। आज उन्हें इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने का अवसर मिलना अपने जीवन का सौभाग्य प्रतीत हो रहा है।

मानव मूल्यों से युक्त श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करती है ब्रह्माकुमारी संस्था : बीके हरेश भाई

व्यवसाय एवं उद्योग प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक बीके हरेश भाई ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ विश्व की एकमात्र ऐसी आध्यात्मिक संस्था है, जिसका संचालन बहनों द्वारा परमात्मा के निर्देशन में किया जाता है। यहां मनुष्य को देवतुल्य गुणों से संपन्न बनाने वाली आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे वह मानवीय मूल्यों, नैतिकता और श्रेष्ठ संस्कारों से समृद्ध होकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सके।

वरिष्ठ राजयोग शिक्षकों ने साझा किए आध्यात्मिक सफलता के सूत्र

सम्मेलन के दौरान राजयोग शिक्षिका बीके दीपा बहन, मुख्यालय संयोजक बीके राजसिंह भाई, बीके लालजी भाई पटेल एवं बीके मोहन भाई पटेल ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं कुशल संचालन मुंबई की बीके नम्रता बहन ने किया।

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