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ब्रह्माकुमारीज ज्ञानसरोवर में ‘रिटर्न जर्नी’ कार्यक्रम, आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन पर जोर

हाईलाइट्स :

  • ब्रह्माकुमारीज के ‘रिटर्न जर्नी मेडिटेशन’ शिविर में आत्मपरिवर्तन का संदेश

  • ब्रह्माकुमारीज के विशेष कार्यक्रम में मिला आंतरिक शांति और सकारात्मक जीवन का संदेश

  • राजयोग मेडिटेशन से गहन शांति की अनुभूति, माउंट आबू में विशेष आध्यात्मिक आयोजन

  • माउंट आबू: चार दिवसीय ‘रिटर्न जर्नी मेडिटेशन’ कार्यक्रम में उमड़े देशभर के साधक

  • रिटर्न जर्नी मेडिटेशन’ से मिला आत्मिक परिवर्तन का संदेश

  • राजयोगिनी दिव्या दीदी ने बताया ‘रिटर्न जर्नी’ का उद्देश्य, करवाई गहन शांति की अनुभूति

  • काम-क्रोध को ‘रिटर्न’ कर दिव्य गुण अपनाने का संदेश, ज्ञानसरोवर में आध्यात्मिक सम्मेलन

  • ब्रह्माकुमारीज के ‘रिटर्न जर्नी मेडिटेशन’ शिविर में आत्मपरिवर्तन का संदेश

  • काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे अवगुणों कोरिटर्नकर दिव्य गुणों की ओर बढ़ने का दिया संदेश

  • मनुष्य से देवता बनने की प्रेरणा, माउंट आबू में आयोजित हुआरिटर्न जर्नी मेडिटेशनशिविर

माउण्ट आबू (राजस्थान) आध्यात्मिक सशक्तिकरण और आत्मिक उत्थान के उद्देश्य से ब्रह्माकुमारी संस्था के ज्ञानसरोवर परिसर में यातायात प्रभाग द्वारा चार दिवसीयरिटर्न जर्नी मेडिटेशनकार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों सहित मुम्बई से बड़ी संख्या में आए भाईबहनों ने कार्यक्रम में भाग लेकर राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास किया तथा उसके आध्यात्मिक रहस्यों को समझा।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि आत्मा की वास्तविक संपत्ति शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद जैसे दिव्य गुण हैं, जबकि काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार जैसे अवगुण आत्मा के मूल स्वभाव का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए जीवन कीरिटर्न जर्नीमें इन अवगुणों को त्यागकर दिव्य गुणों को अपनाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ अत्यंत भव्य वातावरण में हुआ। उपस्थित भाईबहनों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर दीपोत्सव में सहभागिता निभाई, जिससे पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से आलोकित हो उठा।

ट्रांसपोर्ट विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी दिव्या दीदी ने कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा किरिटर्न जर्नीकेवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मा की अपने मूल स्वरूप की ओर लौटने की आध्यात्मिक यात्रा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में व्यक्ति बाहरी उपलब्धियों के पीछे भागते हुए स्वयं से दूर होता जा रहा है, जबकि राजयोग मेडिटेशन हमें अपने वास्तविक स्वरूप और परमात्मा से जोड़ने का सरल मार्ग प्रदान करता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उपस्थित भाईबहनों को राजयोग के माध्यम से गहन शांति एवं आत्मिक शक्ति की अनुभूति करवाई, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार हुआ।

ज्ञानसरोवर की डायरेक्टर राजयोगिनी प्रभा दीदी ने कहा किरिटर्न जर्नीशब्द हमें अपने आदि स्वरूप और प्रारम्भिक दिव्य जीवन की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि परमात्मा ने इस यज्ञ की स्थापना के लिए 14 वर्षों तक योग तपस्या करवाई, जो आज भी संस्था की आध्यात्मिक शक्ति और सफलता की आधारशिला बनी हुई है। इसी तपस्या का परिणाम है कि आज विश्वभर में लाखों लोग ब्रह्माकुमारीज से जुड़कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बना रहे हैं।

संस्था के महासचिव राजयोगी करूणा भाई ने कहा कि मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मनुष्य से देवता बनना है। ब्रह्मा बाबा ने सेवा और साधना के माध्यम से जीवन को उत्कृष्ट बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षण को अंतिम क्षण समझकर जीवन जीने से हमारी स्मृति सदैव श्रेष्ठता और दिव्यता की ओर बनी रहती है।

अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. मृत्युंजय भाई ने कहा कि मौन सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा, “Silence is Power, Speech is Silver” अर्थात् मौन आत्मिक ऊर्जा का स्रोत है। जब हमारी आंतरिक स्थिति शक्तिशाली और निर्मल होती है, तभी हम जीवन की अंतिम यात्रा को भी प्रसन्नता और संतुष्टि के साथ पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन परमात्मा का निःस्वार्थ प्रेम तभी मिलता है जब जीवन निर्मल और पवित्र बने।

यातायात प्रभाग के वाइस चेयरपर्सन राजयोगी डॉ. सुरेश भाई ने कहा कि स्वस्थ शरीर का आधार स्वस्थ मन है।रिटर्न जर्नीकार्यक्रम आत्मविश्लेषण का एक अनमोल अवसर प्रदान करता है। जब व्यक्ति स्वयं को समय देकर अपने विचारों और संस्कारों का मूल्यांकन करता है, तब उसका मन सुमन बन जाता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों का तिलक, स्वमान बैज, पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मान किया गया। चार दिनों तक चले इस आध्यात्मिक शिविर ने प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, आत्मपरिवर्तन और परमात्म स्मृति के माध्यम से श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की।

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