संस्कारों की लौ से रोशन होगा भविष्य, माउण्ट आबू में महिला शक्ति का राष्ट्रीय महाकुंभ

हाईलाइट्स :

  • संस्कारों की शक्ति से बदलेगा समाज, महिला बनेगी परिवर्तन की आधारशिला

  • ज्ञानसरोवर में महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन, देशभर की प्रख्यात महिलाओं ने रखे विचार

  • संस्कारों से सशक्त होगी नारी, तभी बदलेगा समाज : ज्ञानसरोवर सम्मेलन में गूंजा संदेश

  • मोबाइल टॉर्च की रोशनी में जगा महिला शक्ति का संकल्प, माउण्ट आबू में राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न

  • सत्ता नहीं, संस्कार लाते हैं परिवर्तन : देशभर की महिलाओं ने किया आत्मशक्ति जागरण का आह्वान

  • नारी में है सीता की करुणा, दुर्गा की शक्ति और परिवर्तन की क्षमता : ज्ञानसरोवर में राष्ट्रीय चिंतन

  • महिला सशक्तिकरण का नया सूत्र – अधिकारों से आगे, संस्कारों से आत्मबल की ओर

माउण्ट आबू, राजस्थान। बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त शक्ति बनकर उभर रही हैं। यदि महिलाओं के भीतर श्रेष्ठ संस्कारों का जागरण हो जाए तो परिवार, समाज और राष्ट्र – तीनों का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है। इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था के महिला प्रभाग द्वारा ज्ञानसरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ‘संस्कार परिवर्तन द्वारा महिला सशक्तिकरण’ विषय पर चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

देशभर से आईं शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योग जगत की प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने सम्मेलन में भाग लेकर महिला सशक्तिकरण के आध्यात्मिक एवं सामाजिक आयामों पर अपने विचार साझा किए।

दीप प्रज्ज्वलन और हजारों रोशनी ने बनाया प्रेरणादायी वातावरण

सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दौरान सभागार में उपस्थित प्रतिभागियों ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर सहभागिता की। पूरा हार्मनी हॉल प्रकाश की दिव्य आभा से जगमगा उठा और वातावरण में आशा, एकता एवं आत्मशक्ति का अनूठा संदेश प्रसारित हुआ।

परिवर्तन सत्ता से नहीं, संस्कारों से आता हैअनुराधा संघाई

भोपाल से आईं इंडो-यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्षा अनुराधा संघाई ने कहा कि वास्तविक परिवर्तन राजनीति, सत्ता या धन से नहीं बल्कि संस्कारों से आता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनें इस सत्य की जीवंत मिसाल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एक बच्चे की पहली पाठशाला उसकी मां की गोद होती है। जीवन के मूल मूल्य और संस्कार हमें किसी कानून की किताब से नहीं, बल्कि परिवार और घर के वातावरण से प्राप्त होते हैं। संस्कार व्यक्ति के चरित्र की नींव हैं और इनके बिना जीवन में ईमानदारी, विश्वास और उत्कृष्टता का निर्माण संभव नहीं है। इस अवसर पर उनकी चर्चित पुस्तक ‘अनब्रोकन’ का भी लोकार्पण किया गया।

आत्मपरिवर्तन से ही सशक्त बनती है महिला : अभिनेत्री शशी शर्मा

प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री शशी शर्मा ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक महिला बेटी, मां, दादी और समाज की मार्गदर्शक जैसी अनेक भूमिकाएं निभाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ने के बाद उन्हें यह अनुभव हुआ कि मनुष्य स्वयं अपने संस्कारों का निर्माता बन सकता है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि हम महिला सशक्तिकरण की बात तो करते हैं, लेकिन क्या वास्तव में उन अनदेखे पहलुओं को समझने का प्रयास करते हैं, जो महिलाओं के विकास में बाधा बनते हैं?

भारतीय संस्कृति में निहित है नारी शक्ति का गौरव : प्रभा दीदी

ज्ञानसरोवर की डायरेक्टर राजयोगिनी प्रभा दीदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति का स्वरूप माना गया है। सीता की सहनशीलता, पार्वती की तपस्या और दुर्गा की शक्ति प्रत्येक महिला के भीतर विद्यमान है। आवश्यकता केवल इन गुणों को पहचानने और जीवन में धारण करने की है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है और ऐसे समय में महिलाओं की सकारात्मक भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

सेवा का प्रतिफल अपेक्षा नहीं, आत्मसंतोष होना चाहिए

महिला प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी चक्रधारी दीदी ने कहा कि आज अधिकांश लोग अपने कार्यों के बदले प्रशंसा और मान्यता की अपेक्षा रखते हैं। जब अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता तो निराशा उत्पन्न होती है। आध्यात्मिकता हमें सिखाती है कि संबंध और परिस्थितियां हमारे कर्मों का परिणाम हैं। इसलिए महिलाओं को इतना आत्मनिर्भर और आंतरिक रूप से सशक्त बनना होगा कि परिस्थितियां उनकी खुशी को प्रभावित न कर सकें।

निर्णय लेने में सक्षम बनाना ही सच्चा सशक्तिकरण : शिप्रा रॉय

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में लीगल कंसल्टेंट शिप्रा रॉय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं ले सकें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, शिक्षा और नैतिक मूल्यों का समन्वय महिलाओं को समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार करता है।

इतिहास की गलतियों से सीखने की जरूरत

अहमदाबाद से आए दृष्टि फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक दिनेश कुमार गौतम ने कहा कि भारतीय इतिहास में महिलाओं की गौरवशाली भूमिका रही है, लेकिन समय के साथ सामाजिक संरचनाओं में ऐसी विसंगतियां आईं जिन्होंने उनकी स्वतंत्रता को सीमित किया। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज संस्कारों के स्तर पर आत्ममंथन करे और महिलाओं को उनकी वास्तविक गरिमा एवं सम्मान प्रदान करे।

संस्कार ही राष्ट्र निर्माण का आधार

महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके शारदा दीदी ने कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण श्रेष्ठ संस्कारों से होता है। कानून महिलाओं को अधिकार दे सकता है, लेकिन वास्तविक सशक्तिकरण तब होगा जब व्यक्तित्व में आत्मविश्वास, मूल्यों और नैतिकता का विकास होगा। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारों की प्राप्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्कारों का परिवर्तन ही एक सुदृढ़ और संवेदनशील समाज की स्थापना कर सकता है।

अनेक विशिष्ट हस्तियों ने रखे विचार

सम्मेलन को पूनम चौधरी, मिस इंडिया 2026 निशी श्रीवास्तव, राजयोगिनी शीलू दीदी, बीके तमन्ना तथा डॉ. बिन्नी बहन सहित अनेक वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका राजयोगिनी डॉ. सविता दीदी ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों का तिलक, पुष्पगुच्छ, बैज एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। सम्मेलन के दौरान बार-बार यह संदेश गूंजता रहा कि यदि समाज में स्थायी परिवर्तन लाना है तो उसकी शुरुआत महिलाओं के संस्कारों और आत्मशक्ति को जागृत करने से करनी होगी।

संस्कारों के जागरण का राष्ट्रीय अभियान

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महिला सशक्तिकरण की वास्तविक शुरुआत आत्मपरिवर्तन और संस्कार परिवर्तन से होती है। जब एक महिला अपने भीतर सकारात्मक मूल्यों को जागृत करती है, तब वह केवल स्वयं का नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करती है। चार दिवसीय यह राष्ट्रीय सम्मेलन महिलाओं में आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देकर एक नए सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

Check Also

विश्व शांति और सशक्त भारत के संकल्प के साथ ब्रह्माकुमारी कार्यकारिणी की वार्षिक मीटिंग का शुभारंभ

🔊 Listen to this आबू रोड, राजस्थान। 4 अप्रैल से डायमण्ड हॉल में प्रारंभ हुई …

Navyug Times