हाईलाइट्स
उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा एवं कला संस्कृति प्रभाग की अध्यक्षा ने कलश और शिवध्वज दिखाकर किया शुभारंभ
ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय सम्मेलन में कला एवं संस्कृति जगत के विशेषज्ञों का मंथन
परिवार केवल रिश्तों का नाम नहीं, बल्कि संस्कारों, विश्वास और प्रेम की सबसे मजबूत नींव
🌸 परिवार ही संस्कृति की पहली पाठशाला, सकारात्मकता से होंगे पारिवारिक मूल्यों का पुनर्जागरण 🌸
🌸 परिवार मजबूत होगा, तभी समाज और संस्कृति भी मजबूत होगी 🌸
✨ सकारात्मकता ही सफलता की मास्टर-की है और परिवार ही जीवन के संस्कारों की पहली पाठशाला ✨
✨ जब परिवार में मूल्य जीवित रहते हैं, तभी राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित रहता है

माउण्ट आबू, राजस्थान। बदलती आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ब्रह्माकुमारी संस्था के कला एवं संस्कृति प्रभाग द्वारा ज्ञानसरोवर परिसर में ‘आधुनिक संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों के संवर्धन की कला’ विषय पर आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान एक वर्ष तक चलने वाले ‘पारिवारिक सद्भावना अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया गया। अभियान का उद्घाटन उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूल सिंह मीणा एवं कला एवं संस्कृति प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा राजयोगिनी चंद्रिका दीदी ने कलश एवं शिवध्वज दिखाकर किया। इस सम्मेलन में देशभर से कला, संस्कृति, संगीत, रंगमंच, फैशन, मीडिया एवं शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लेकर परिवार, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूल सिंह मीणा ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध आबू पर्वत केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी पावन स्थल है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने मन को एकाग्र कर स्वयं को परमात्मा के सुपुर्द कर देता है और आत्मा का संबंध परमात्मा से जोड़ लेता है, तब उसे जीवन में किसी अन्य उपलब्धि की आवश्यकता महसूस नहीं होती। परमात्मा से जुड़ने के बाद व्यक्ति सांसारिक तनावों से ऊपर उठकर शांति और आनंद का अनुभव करता है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था जीवन को सफल, संतुलित और तनावमुक्त बनाने की ऐसी कला सिखाती है, जिसमें किसी प्रकार का लोभ, लालच या स्वार्थ नहीं है। यह संस्था केवल मानव जीवन को श्रेष्ठ, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने का कार्य कर रही है।

इंदौर से आए प्रसिद्ध पार्श्वगायक चिंतन बंकिवाला ने कहा कि ज्ञानसरोवर आना उनके लिए ईश्वर का पावन संयोग है। उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सकारात्मकता और आशा का संदेश देने वाली शक्ति है, जिसे वे देश-विदेश तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फैशन टेक्नोलॉजी एवं डिजाइनिंग विभाग की अध्यक्षा डॉ. डॉली मोगरा ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों के बीच छोटी-छोटी दूरियां बड़ी गांठों का रूप ले लेती हैं। भारतीय कला और संस्कृति सदैव पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधने का माध्यम रही है। आज आवश्यकता है कि हम अपने पारिवारिक मूल्यों के क्षरण के कारणों पर गंभीरता से विचार करें।

संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं ज्ञानसरोवर की निदेशक राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय वास्तव में जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य कला केंद्र है, जहां आध्यात्मिक ज्ञान और विज्ञान का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

संस्था के महासचिव राजयोगी करूणा भाई ने कहा कि भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति विश्व को शांति, सद्भाव और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का संदेश देती रही है। आज आवश्यकता है कि उन्हीं मूल्यों को पुनः अपने जीवन में अपनाया जाए।

कला एवं संस्कृति प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी चंद्रिका दीदी ने कहा कि सकारात्मकता ही सफलता की मास्टर-की है। यदि हम प्रत्येक व्यक्ति को परमात्मा की श्रेष्ठ संतान मानकर उसके प्रति सम्मान और विश्वास का भाव रखें, तो यही सोच समाज और विश्व परिवर्तन का आधार बन सकती है।

आकाशवाणी अहमदाबाद के विभागाध्यक्ष डॉ. चिराग भोरणिया ने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ पारिवारिक मूल्यों को जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने घर में व्यवहार के रूप में देखते हैं, इसलिए माता-पिता को स्वयं आदर्श प्रस्तुत करना होगा।

कला एवं संस्कृति प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका राजयोगिनी बीके प्रेम दीदी ने कहा कि यदि परिवार के मूल्यों को पुनः जागृत कर लिया जाए, तो जीवन के अन्य सभी नैतिक मूल्य स्वतः विकसित होने लगेंगे। आधुनिक संस्कृति के प्रभाव में भारतीय पारिवारिक परंपराएं कमजोर हुई हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय संयोजिका बीके पूनम दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सरलता, विनम्रता और विशाल हृदय कलाकारों की सबसे बड़ी पहचान है। कलाकार स्वभावतः एकाग्रता, शांति और संवेदनशीलता से जुड़े होते हैं, जो समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सम्मेलन को अभिनेत्री रश्मिका उपाध्याय, सोलापुर जिला नाट्य कलाकार संघ के उपाध्यक्ष श्रीधर काम्बले, राजयोगिनी तृप्ति बहन, बीके फाल्गुनी बहन, बीके दयाल भाई, बीके तपस्विनी बहन, बीके कुसुम दीदी, बीके अनिल भाई, बीके सतीश भाई सहित देशभर से आए अनेक कलाकारों, शिक्षाविदों एवं संस्कृति विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया तथा पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
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