हाईलाइट्स
❤️ जब इंसान इंसान के काम आया: रक्तवीरों के सम्मान में भावुक हुआ ग्लोबल ऑडिटोरियम
🩸 अनजान चेहरों की उम्मीद बने रक्तदाता, विश्व रक्तदाता दिवस पर गूंजा मानवता का संदेश
✨ रक्तदान नहीं, जीवनदान है: आबू रोड में रक्तवीरों को मिला सम्मान
🏆 76 बार रक्तदान, 50 बार जीवन की सौगात—रक्तदाताओं को नमन करने उमड़ा समाज
आबू रोड, राजस्थान। किसी अनजान व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लौटाना, किसी मां की गोद सूनी होने से बचाना या किसी बच्चे को नया जीवन देना—यह सब संभव होता है रक्तदाताओं की उस निःस्वार्थ भावना से, जो मानवता की सबसे सुंदर मिसाल बनकर समाज के सामने आती है। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्था के ग्लोबल ऑडिटोरियम में रोटरी इंटरनेशनल और ग्लोबल हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य समारोह इसी मानवीय संवेदना और सेवा भावना को समर्पित रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद वर्षों से रक्तदान कर मानव जीवन बचाने वाले रक्तवीरों को सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित वक्ताओं ने रक्तदान को केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताया।

आबू-पिण्डवाड़ा के विधायक समाराम गारासिया, जिन्होंने स्वयं 40 से अधिक बार रक्तदान किया है और प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन पर रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं, ने भावुक शब्दों में कहा, “रक्तदाता वास्तव में जीवनदाता हैं। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों, गंभीर मरीजों और दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सांसें आपके कारण चलती हैं। मैं ऐसे रक्तवीरों को बार-बार प्रणाम करता हूं। रक्त के सच्चे भामाशाह आप ही हैं।”

उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था और ग्लोबल हॉस्पिटल की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में इन संस्थाओं का योगदान ऐतिहासिक रहा है। आज आदिवासी समाज भी रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा ने कहा कि सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि भारत में अभी भी केवल लगभग दो प्रतिशत लोग ही नियमित रक्तदान करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह आंदोलन अब समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है।

रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि राजेंद्र वाटलीवाल ने रक्तदाताओं को समाज का श्रेष्ठतम दानी बताते हुए कहा कि “रक्तदान करने वाला व्यक्ति यह जाने बिना कि उसका रक्त किसके काम आएगा, निःस्वार्थ भाव से किसी अनजान जीवन को बचाने का संकल्प लेता है। इससे बड़ा दान कोई नहीं हो सकता।” उन्होंने वर्ष 2009 से प्रारंभ हुए इस अभियान की यात्रा को याद करते हुए कहा कि आज हजारों लोगों का जीवन रक्तदाताओं की बदौलत सुरक्षित हुआ है।

ग्लोबल हॉस्पिटल ब्लड बैंक की प्रबंधक अर्चना भंडारी ने रक्तदाताओं को “गुमनाम नायक” की संज्ञा देते हुए कहा कि गंभीर दुर्घटनाओं, जटिल शल्य चिकित्सा, प्रसवकालीन आपात स्थितियों, कैंसर और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों में सुरक्षित रक्त ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाता है। उन्होंने कहा कि विश्व रक्तदाता दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का वैश्विक अभियान है।

ब्रह्माकुमारी संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि “खून देना अर्थात जीवन देना। किसी की सांसों को बचाना सबसे बड़ा पुण्य और सबसे महान मानव धर्म है।”

मेडिकल प्रभाग के सचिव डॉ. बनारसी भाई ने रक्तदाताओं को महादानी बताते हुए कहा कि कई बार रक्तदाता को यह भी ज्ञात नहीं होता कि उसकी एक यूनिट रक्त किसी ऐसे मरीज की जिंदगी बचा रही है जो अंतिम सांसें गिन रहा होता है। ऐसे निस्वार्थ सेवाधारी वास्तव में समाज के प्रेरणास्रोत हैं।

माउंट आबू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सचिव सलीम भाई ने कहा कि ब्लड बैंक प्रभारी बीके धर्मेंद्र भाई द्वारा वर्षों पूर्व बोया गया प्रेम और सेवा का बीज आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है। यही कारण है कि दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी लोग रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सबसे पहले ग्लोबल हॉस्पिटल की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते हैं।
अनुभवों ने छू लिए दिल

कार्यक्रम में अनेक नियमित रक्तदाताओं ने अपने अनुभव साझा किए। रेवदर के नंदगांव गोशाला ट्रस्ट के ट्रस्टी रणछोड़जी पुरोहित, जो 50 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं, तथा माउंट आबू के प्लेटिनम डोनर दीपक त्रिपाठी, जिन्होंने 76 बार रक्तदान किया है, ने युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।

दीपक त्रिपाठी ने कहा, “रक्तदान अपने आप में एक सुखद अनुभूति है। 1994 में पहली बार रक्तदान करने के बाद मुझे कभी कमजोरी या कोई दुष्प्रभाव महसूस नहीं हुआ। मेरा आग्रह है कि हम केवल स्वयं रक्तदान न करें, बल्कि नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें।”

महात्मा गांधी विद्यालय के शिक्षक तन्मय भाई, जिन्होंने 29 बार रक्तदान किया है, ने कहा कि “रक्तदान महादान केवल एक नारा नहीं, बल्कि आज के युग का शाश्वत सत्य है। हमें कभी पता नहीं चलता कि हमारी रक्त की कुछ बूंदें किसी जरूरतमंद के जीवन में कितनी बड़ी आशा बन जाती हैं।”

कार्यक्रम में ग्लोबल हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर के रश्मिकांत आचार्य, सिरोही सेवा केंद्र की संचालिका बीके अरुणा दीदी, बीके लीला दीदी, सामाजिक सेवा प्रभाग के मुख्यालय समन्वयक बीके वीरेंद्र भाई, ब्लड बैंक प्रभारी बीके धर्मेंद्र भाई, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुरेश थिंगर, नकुल ओझा तथा लक्ष्मण सहित अनेक वक्ताओं ने भी अपने विचार और अनुभव साझा किए।
विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह समारोह एक बार फिर यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि रक्तदान केवल रक्त का दान नहीं, बल्कि किसी अनजान जीवन को आशा, विश्वास और नया भविष्य देने का संकल्प है।
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