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शांतिवन आबूरोड में जन्माष्टमी की भव्य झांकी | राजयोग साधना से जीवंत बने श्रीकृष्ण के पात्र

आबूरोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में जन्माष्टमी पर्व पर श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला। दो दिवसीय भव्य आध्यात्मिक झांकी ने हजारों श्रद्धालुओं को न केवल श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का दर्शन कराया, बल्कि वर्तमान जीवन से श्रेष्ठ जीवन की प्रेरणा भी दी।

शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने झांकी में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, कालिय नाग मर्दन, गीता ज्ञान का दिव्य संदेश, वर्तमान कलियुग की चुनौतियां तथा स्वर्णिम युग की सुख-शांति से परिपूर्ण झलक का सजीव अनुभव किया। प्रत्येक दृश्य भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर रहा था।

  • महीनों की राजयोग साधना से पात्रों में आई जीवंतता

इस झांकी की सबसे विशिष्ट विशेषता यह रही कि इसमें अभिनय करने वाले बालक-बालिकाओं एवं भाई-बहनों ने केवल वेशभूषा ही नहीं अपनाई, बल्कि महीनों तक राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कर अपने संस्कारों और व्यक्तित्व को उस दिव्य पात्र के अनुरूप ढालने का प्रयास किया। यही साधना झांकी को सामान्य प्रस्तुति से आगे बढ़ाकर एक आध्यात्मिक अनुभूति में परिवर्तित कर गई।

  • अतिथियों ने किया शुभारंभ

झांकी का शुभारंभ ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी, महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई, बीके प्रकाश भाई, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव हरीश चौधरी, जिला व्यापार संघ के अध्यक्ष अशोक गर्ग तथा महामंत्री मनीष जैन ने रिबन काटकर किया। अतिथियों ने झांकी के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत एवं नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।

  • अनेक भाई-बहनों के समर्पण से हुआ साकार

इस दिव्य झांकी के निर्माण एवं सफल आयोजन में बीके देव भाई, बीके रमेश भाई, बीके चिरंजीलाल भाई, बीके अमरदीप भाई, बीके सुरेश भाई, बीके केशव भाई, बीके बिंदेश्वरी भाई, बीके शंकर भाई, बीके श्रीनिवास भाई सहित अनेक भाई-बहनों ने महीनों के समर्पित पुरुषार्थ से महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रेरणा- श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि जब मन राजयोग से जुड़ता है, तब व्यक्ति परिस्थितियों का नहीं, बल्कि अपने संस्कारों का विजेता बन जाता है। यही दिव्य परिवर्तन एक सुखी और संस्कारित समाज की वास्तविक आधारशिला है।

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