
आबू रोड, राजस्थान। भारत के पावन पर्व रक्षाबंधन को ब्रह्माकुमारीज़ संस्था में आध्यात्मिक गरिमा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके शशी दीदी द्वारा परमात्मा शिव को भोग अर्पित करने से हुआ। इसके बाद समूचे परिसर में रक्षा-संकल्प, पवित्रता और भाई-बहन के दिव्य स्नेह का संदेश देते हुए रक्षाबंधन उत्सव का शुभारंभ किया गया।

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सेवा, तपस्या और यज्ञ-रक्षा का दिया संदेश – बीके मुन्नी दीदी

डायमण्ड हॉल में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए संस्था की सह-मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि परमात्मा द्वारा आत्माओं को सुरक्षा और मर्यादा का दिव्य सूत्र बांधने की स्मृति भी है। उन्होंने कहा कि सेवा हमारा श्रेष्ठ भाग्य बनाती है और समय की आवश्यकता है कि प्रत्येक आत्मा अपनी स्व-स्थिति को सशक्त करते हुए तपस्या को बढ़ाए। हम यज्ञ रक्षक हैं, इसलिए यज्ञ की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

मुन्नी दीदी ने अव्यक्त दादी प्रकाशमणि जी को स्मरण करते हुए बताया कि रक्षाबंधन का यह पर्व दादी जी की मधुर यादों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दादी जी प्रत्येक त्योहार को अद्भुत उमंग और उत्साह के साथ मनाती थीं। इस अवसर पर मुंबई के मुलुंड सेवा केंद्र द्वारा पिछले 25 वर्षों से भेजी जा रही सुंदर राखियों से डायमण्ड हॉल का मंच विशेष रूप से सजाया गया।

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तीन गांठों में समाया सम्पूर्ण जीवन का संरक्षण – बीके उषा दीदी

वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल वक्ता राजयोगिनी बीके उषा दीदी ने कहा कि हम सभी का सर्वोच्च सौभाग्य है कि परमात्मा के घर में दिव्य राखी का पर्व मना रहे हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा प्रत्येक आत्मा को वरदानों से भरने के साथ चमकीली आध्यात्मिक राखी पहनाते हैं और अपने वरदानी हस्त का अनुभव कराते हैं।
उषा दीदी ने परमात्मा द्वारा बांधी जाने वाली राखी में तीन गांठों का आध्यात्मिक अर्थ समझाया—
- स्वरक्षक – अपनी मनःस्थिति और संकल्पों की रक्षा करना।
- मर्यादा रक्षक – अमृतवेले से रात्रि तक मिली ईश्वरीय मर्यादाओं का पालन करना।
- यज्ञ रक्षक – वातावरण को निर्विघ्न बनाकर ईश्वरीय यज्ञ की सुरक्षा करना।
उन्होंने कहा कि जब हम इन तीनों रक्षाओं का पालन करते हैं, तभी जीवन में परमात्मा की वास्तविक सुरक्षा का अनुभव होता है।

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रक्षासूत्र है स्नेह, पवित्रता और ईश्वरीय प्रेम का प्रतीक
उषा दीदी ने आगे कहा कि यह केवल दो धागों की राखी नहीं, बल्कि स्नेह, पवित्रता, ईश्वरीय प्रेम और सुरक्षा का दिव्य सूत्र है। संगमयुग में परमात्मा जो आध्यात्मिक राखी आत्माओं को बांधते हैं, वही आगे चलकर द्वापर युग में रक्षाबंधन के स्मृति पर्व के रूप में मनाया जाता है। भारत की प्रत्येक आत्मा इस रक्षासूत्र को अपना सौभाग्य मानकर प्रेमपूर्वक धारण करती है।
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पवित्र दृष्टि ही रक्षाबंधन का वास्तविक आधार – करूणा भाई

संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करूणा भाई ने कहा कि भगवान का संदेश है – मनमनाभव। अर्थात सदा एक परमात्मा को याद करो। ब्रह्माकुमारीज़ में सभी आत्माओं को भाई-बहन की पवित्र दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि पवित्रता ही संस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत का रक्षाबंधन पर्व विश्व में अद्वितीय है, जहां भाई अपनी बहन की सुख-शांति और सुरक्षा का संकल्प लेता है। यही पवित्र भावना इस महोत्सव को विशेष बनाती है।
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राखी नई दुनिया के निर्माण का संकल्प है – डॉ. मृत्युंजय भाई

संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि रक्षाबंधन केवल व्यक्तिगत संबंधों का उत्सव नहीं, बल्कि एक नई पवित्र दुनिया के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने आत्म-रक्षक, यज्ञ-रक्षक, कुल-रक्षक, पर्यावरण-रक्षक और विश्व-रक्षक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि यह पर्व माया से विदाई, व्यर्थ संकल्पों के अंत और परमात्मा के समान गुणों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देता है।
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अनेक वरिष्ठ राजयोगी एवं गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित

समारोह में संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके शशी दीदी, ज्ञानसरोवर की राजयोगिनी प्रभा दीदी, पांडव भवन की राजयोगिनी उषा दीदी, राजयोगिनी रुक्मणी दीदी, ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा, ज्ञानामृत प्रेस के आत्मप्रकाश भाई, मेडिकल विंग के सचिव डॉ. बनारसी लाल शाह, इंजीनियरिंग विंग के बीके मोहन सिंघल, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता, राजयोगी बीके प्रकाश भाई, आवास-निवास के बीके देव भाई सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ राजयोगी भाई-बहन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मंच का कुशल संचालन महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका व वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका डॉ.सविता दीदी ने किया।
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