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दादी प्रकाशमणि जी की स्मृतियां आज भी करोड़ों आत्माओं के जीवन को कर रही हैं आलोकित

हाईलाइट्स –

  • 19वें स्मृति दिवस पर प्रकाश स्तंभ पर उमड़े श्रद्धालु, प्रेमसेवाशांति के मार्ग पर चलने का लिया संकल्प

  • विश्व की दादी को भावभीनी श्रद्धांजलि, शांतिवन के प्रकाश स्तंभ पर उमड़ा श्रद्धा का सागर

  • प्रेम, सेवा और त्याग की अमर मिसाल थीं दादी प्रकाशमणि जी: करुणा भाई

  • दादी जी का जीवन मानवता के लिए सदैव प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ रहेगा

आबू रोड, राजस्थान। कुछ महान आत्माएँ भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके संस्कार, उनके आदर्श और उनका प्रेम युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करते रहते हैं। ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका पूज्य दादी प्रकाशमणि जी के 19वें स्मृति दिवस के अवसर पर शांतिवन स्थित प्रकाश स्तंभ श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक भावनाओं का केंद्र बन गया।

प्रातःकाल से ही देश-विदेश से आए हजारों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने दादी जी के स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए प्रेम, सेवा, त्याग और राजयोग के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। दादी प्रकाशमणि जी को पूरे विश्व में स्नेहपूर्वक “विश्व की दादी” कहा जाता है। उन्होंने अपनी करुणा, मातृवत स्नेह और आध्यात्मिक दृष्टि से लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में आशा और आत्मविश्वास का संचार किया। विश्व के अनेक देशों में जाकर उन्होंने परमात्मा का शांति संदेश पहुँचाया तथा अनेक राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने उनके आध्यात्मिक योगदान का सम्मान किया।

  • बालिका रमा से विश्व की प्रेरणा बनने तक की यात्रा

सन् 1922 में अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में जन्मी दादी जी का बचपन का नाम रमा था। मात्र 14 वर्ष की आयु में वे ओम मंडली (वर्तमान ब्रह्माकुमारीज़) के संपर्क में आईं और 1936 में अपना सम्पूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा एवं मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

18 जनवरी 1969 को प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात उन्होंने संस्था की मुख्य प्रशासिका का दायित्व संभाला। अगले 38 वर्षों तक उनके कुशल नेतृत्व में ब्रह्माकुमारीज़ ने विश्वव्यापी आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया।

  • राजयोगिनी मुन्नी दीदी ने कहा – दादी जी का प्रेम आज भी जीवित है

संस्था की सह-मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि दादी प्रकाशमणि जी का जीवन स्वयं में एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय था। उन्होंने हर आत्मा को प्रेम देना, सबको साथ लेकर चलना और परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सिखाया। आज उनका भौतिक स्वरूप भले दिखाई नहीं देता, लेकिन उनका प्रेम और आशीर्वाद प्रत्येक ईश्वरीय संतान के संकल्पों में जीवित है।

  • महासचिव राजयोगी करुणा भाई बोले – उनका जीवन मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ है

ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव राजयोगी करुणा भाई ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी ने अपने त्याग, तपस्या और दूरदर्शी नेतृत्व से संस्था को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया। उन्होंने आध्यात्मिकता को केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला बनाया। आज आवश्यकता है कि हम उनके मूल्यों -मधुरता, सेवा और विश्व बंधुत्व – को अपने व्यवहार में उतारें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

  • राजयोगी मृत्युंजय भाई ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश

संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. मृत्युंजय भाई ने कहा कि दादी जी का सम्पूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि संकल्प मनुष्य का भविष्य बनाते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि यदि जीवन में शांति, सफलता और संतुलन चाहिए तो राजयोग, सकारात्मक चिंतन और निःस्वार्थ सेवा को अपनाना होगा। दादी जी की प्रेरणा आज भी नई पीढ़ी के लिए उज्ज्वल मार्गदर्शक बनी हुई है।

  • सच्ची श्रद्धांजलि का संकल्प

स्मृति समारोह के अंत में उपस्थित सभी भाई-बहनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपने प्रत्येक विचार में शांति, प्रत्येक शब्द में मधुरता और प्रत्येक कर्म में सेवा का भाव भरकर दादी प्रकाशमणि जी के आदर्शों को अपने जीवन में साकार करेंगे। यही उनके 19वें स्मृति दिवस पर सबसे बड़ी और सच्ची श्रद्धांजलि रही।

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