हाईलाइट्स
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ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के प्रशासकों, प्रबंधकों एवं कार्यपालकों ने लिया भाग
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राजयोग से कार्यसंस्कृति में आया सकारात्मक बदलाव : मनोज कुमार
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मूल्य आधारित सशक्तिकरण ही समय की आवश्यकता : अवधेश प्रताप सिंह
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स्व–परिवर्तन से विश्व परिवर्तन की दिशा में कर्मयोग सम्मेलन का शुभारंभ
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ज्ञानसरोवर में प्रशासकों का राष्ट्रीय सम्मेलन, कर्मयोग पर हुआ मंथन
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ज्ञानसरोवर में राष्ट्रीय सम्मेलन, प्रशासन को सशक्त बनाने पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
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स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन तक : ज्ञानसरोवर में कर्मयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन

आबू रोड, राजस्थान। ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रशासनिक प्रभाग द्वारा ज्ञानसरोवर स्थित हार्मनी हॉल में “प्रशासन को सशक्त बनाने के लिए कर्मयोग” विषय पर चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रशासकों, कार्यपालकों एवं प्रबंधकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट के अतिरिक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा संचालित राजयोग एवं मेडिटेशन कार्यक्रमों ने उनके विभाग की कार्यसंस्कृति में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्होंने बताया कि लगभग 400 कर्मचारियों वाले विभाग में एक वर्ष तक नियमित रूप से मेडिटेशन सत्र आयोजित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों के व्यवहार, आपसी समन्वय और कार्यक्षमता में आश्चर्यजनक सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा कि परिवर्तन केवल उच्च स्तर पर ही नहीं, बल्कि संगठन के प्रत्येक स्तर पर अनुभव किया गया।
मूल्य आधारित सशक्तिकरण समय की आवश्यकता : अवधेश प्रताप सिंह

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि भौतिक रूप से समाज निरंतर सशक्त हो रहा है, लेकिन आंतरिक सशक्तिकरण और मानवीय मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण वही है जो मूल्य-आधारित हो। आज समाज में योग्यता तो बढ़ रही है, किंतु नैतिकता और मानवीय संवेदनाएं कमजोर होती जा रही हैं। ऐसे वातावरण में प्रशासकों, प्रबंधकों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण आवश्यक है।
भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का संकल्प लें : सुदेश दीदी

ज्ञानसरोवर की निदेशिका एवं संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मस्वरूप में स्थित होकर स्वयं को राजा आत्मा के रूप में अनुभव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक और प्रशासक के सिर पर राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी का ताज है तथा हम सभी का लक्ष्य भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का होना चाहिए।
स्व–परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का संदेश देता है राजयोग : करूणा भाई

ब्रह्माकुमारीज के महासचिव राजयोगी करूणा भाई ने कहा कि संस्था का मूल मंत्र “स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन” है। राजयोग मनुष्य को परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका स्वामी बनना सिखाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों और मन पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही वास्तविक अर्थों में नेतृत्व करने योग्य बनता है।
जब सेवा और आध्यात्मिकता का समन्वय होता है, तभी कर्म पूजा का स्वरूप धारण करता है : आशा दीदी

प्रशासनिक प्रभाग की चेयरपर्सन एवं ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि कर्मयोग का अर्थ है कर्म करते हुए परमात्मा से निरंतर जुड़ाव बनाए रखना। उन्होंने कहा कि प्रशासक के पास नियंत्रण और निर्णय लेने की शक्ति होती है, लेकिन उसे सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि वह जनता का सेवक है। जब सेवा और आध्यात्मिकता का समन्वय होता है, तभी कर्म पूजा का स्वरूप धारण करता है।
इन गणमान्य वक्ताओं ने भी रखे विचार…

प्रशासनिक प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक बीके हरीश भाई ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ज्ञानसरोवर जैसे आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित यह सम्मेलन प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों को नई ऊर्जा, सकारात्मक दृष्टिकोण और मूल्य-आधारित नेतृत्व प्रदान करेगा।

कार्यक्रम में ज्ञानसरोवर की निदेशिका राजयोगिनी प्रभा दीदी तथा गोधरा से बीके शैलेष भाई ने भी अपने शुभकामना संदेश दिए। मंच संचालन प्रशासनिक प्रभाग की अतिरिक्त राष्ट्रीय समन्वयक बीके राधा दीदी (लखनऊ) ने किया। इससे पूर्व सभी विशिष्ट अतिथियों का तिलक, बैज, पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।


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