स्वर्ग देखना हो तो मधुबन में देखो – दादी हृदयमोहिनी

परमात्मा चाहते हैं कि हर बच्चा परिवर्तन हो जाएं

नवयुग टाइम्स के जीवन मंत्र के इस कॉलम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। यह कॉलम जीवन में प्रेरणा देने वाला है और हमारे पुरूषार्थ को आगे बढ़ाने वाला है। इस कॉलम के अन्तर्गत हम ब्रह्माकुमारी संस्था की सह-मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी अनमोल वचनों को सुनेंगे, पढ़ेंगे और उसे जीवन में अपनाएंगे।

ब्रह्माकुमारी संस्था की सह-मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी

मधुबन ब्रह्मा बाबा के तपस्या की भूमि और शिवबाबा की पधरामणि भूमि है। यहां जो भी हमारी बड़ी दादियां हैं, उन्हों की भी छत्रछाया मधुबन में है। मधुबन में आना यह भी एक भाग्य की निशानी है। मधुबन सचमुच में जादू की एक नगरी है। जो भी यहां आता है उस पर मधुबन की छाप लग जाती है। यहां आते ही, देखते ही, चक्र लगाते ही बदल जाते हैं। यह तो रूहानी जादू है ही। यहां जो भी आते चाहे वो कितने भी एन्टी क्यों न हो मधुबन की धरनी में बदल जाते हैं। इसका कारण क्या है? यह तपस्या की भूमि है। तपस्या में इतनी शक्ति है, जो मनुष्य को बदल देती है। जो भी यहां आते हैं सबके मुख से यही निकलता है कि यह स्वर्ग है। पता नहीं मरने के बाद स्वर्ग में जायें या न जायें लेकिन इन आंखों से हमने स्वर्ग देख लिया है। लोगों को इतनी फीलिंग, इतनी भासना आना यह कोई कम बात नहीं है। बाबा कहते हैं जब तपस्या भूमि में भी इतनी पॉवर है तो आप बच्चों में कितनी पावर होनी चाहिए। बाबा (भगवान) हमसे यही चाहते हैं कि हरेक बच्चा टर्न हो जाए, परिवर्तन हो जाएं क्योंकि अपनी कमियों को हरेक खुद तो जानता ही है। दूसरा कोई कहेगा तो टाल-मटोल कर सकते है। देह अभिमान के संस्कार पक्के होने के कारण दूसरा कोई कमी सुनायेगा तो कहेंगे नहीं, ऐसा नहीं है। मतलब कुछ न कुछ टालेंगे लेकिन अपने आपको तो नहीं टाल सकते हैं ना।

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